लोड पीक कैपिंग (Peak Shaving) उद्योग में India के लिए क्या है और कैसे करें?

लोड पीक कैपिंग यानी आपके कारखाने की सबसे ऊँची बिजली माँग (Maximum Demand) को नियंत्रित करके काटना, ताकि DISCOM का डिमांड चार्ज न बढ़े। India में यह अक्सर बैटरी स्टोरेज (BESS), लोड शेड्यूलिंग और ऑटोमेशन से किया जाता है।
आपकी बिजली का बिल दो हिस्सों में आता है — यूनिट चार्ज (kWh) और डिमांड चार्ज (kVA/kW की अधिकतम माँग पर)। मीटर आमतौर पर हर 15/30 मिनट के ब्लॉक की औसत माँग रिकॉर्ड करता है; महीने की सबसे ऊँची रीडिंग पर पूरा डिमांड चार्ज लगता है। पीक कैपिंग का मतलब है इस एक ऊँची चोटी को नीचे रखना — यानी जब कई बड़ी मशीनें एक साथ चलें, तब माँग को कृत्रिम शिखर तक न जाने देना। एक ही बेकाबू स्टार्ट-अप महीनों तक बिल महँगा कर सकता है।

1) लोड प्रोफ़ाइल पढ़ें: स्मार्ट/CT मीटर से पता करें कि पीक किस समय और किस मशीन से बनता है। 2) लोड शेड्यूलिंग: बड़ी मोटर, कम्प्रेसर, फर्नेस को एक साथ चालू न करें; स्टैगर करें। 3) कॉन्ट्रैक्ट/सैंक्शन्ड डिमांड सही रखें — बहुत ज़्यादा रखने पर फ़िक्स्ड चार्ज बेकार जाता है, बहुत कम रखने पर पेनल्टी लगती है। 4) बैटरी स्टोरेज (BESS): पीक के दौरान बैटरी डिस्चार्ज करके ग्रिड से ली गई माँग को थ्रेशोल्ड के नीचे रखें।

BESS एक EMS (Energy Management System) के साथ चलती है जिसमें मासिक थ्रेशोल्ड सेट होता है। जब ग्रिड माँग उस सीमा को छूने लगती है, बैटरी अपनी संचित ऊर्जा से अंतर की भरपाई करती है, इसलिए मीटर पर दर्ज अधिकतम माँग नीचे रहती है। यह तभी काम करता है जब बैटरी की क्षमता (kW/kWh), लोड-पूर्वानुमान और प्राथमिकता सही से डिज़ाइन हो — केवल बैटरी लगा देना काफी नहीं।

India में डिमांड चार्ज और टैरिफ राज्य के बिजली रेगुलेटरी आयोग (SERC) तय करते हैं और वितरण कंपनी (DISCOM) वसूलती है — जैसे MSEDCL (महाराष्ट्र), TANGEDCO (तमिलनाडु), BESCOM (कर्नाटक), UPPCL (उत्तर प्रदेश), GUVNL (गुजरात)। HT औद्योगिक कनेक्शनों पर डिमांड चार्ज प्रति kVA लगता है और कॉन्ट्रैक्ट डिमांड से ज़्यादा खींचने पर पेनल्टी लगती है। सटीक दरें राज्य और श्रेणी के अनुसार बदलती हैं — इसलिए अपने नवीनतम टैरिफ ऑर्डर की पुष्टि करें।

कई India DISCOM Time-of-Day (ToD) टैरिफ चलाती हैं — पीक घंटों में यूनिट महँगी, ऑफ-पीक में सस्ती। पीक घंटों में बैटरी/लोड-शिफ्टिंग से आप महँगे स्लॉट टाल सकते हैं। साथ ही खराब पावर फैक्टर (cosφ) पर पेनल्टी और अच्छे पर इंसेंटिव मिलता है; कैपेसिटर/एक्टिव कम्पेन्सेशन से kVA माँग घटती है, जिससे डिमांड चार्ज भी घटता है।
हाँ, तब जब आपकी पीक तेज़ और कम अवधि की हो और डिमांड चार्ज का बिल में हिस्सा बड़ा हो। पहले अपनी 15-मिनट लोड प्रोफ़ाइल मापें, पीक की ऊँचाई व अवधि देखें, फिर उसी आधार पर बैटरी/ऑटोमेशन का आकार तय करें। बिना माप के आकार तय करना जोखिम है — इसलिए पहले डेटा, फिर निवेश।