ड्रोन से फोटोवोल्टिक निरीक्षण और थर्मोग्राफी — भारत में कैसे कराएँ

ड्रोन से सोलर प्लांट की जाँच का मतलब है: हवा से, थर्मल (इन्फ्रारेड/IR) कैमरे के साथ, कम समय में हर मॉड्यूल की खराबी पकड़ना — बिना मचान लगाए और बिना प्लांट बंद किए। खराब सेल, हॉटस्पॉट, बंद स्ट्रिंग और धूल तापमान के पैटर्न के रूप में दिखते हैं, बिजली उत्पादन गिरने से पहले ही।
एक ड्रोन पर लगा IR (थर्मल) कैमरा हर मॉड्यूल के तापमान का चित्र लेता है। दोषपूर्ण सेल और खराब कनेक्शन आसपास से ज़्यादा गरम होते हैं और थर्मल इमेज में साफ़ चमकते धब्बों के रूप में दिखते हैं। इससे आँख या साधारण फोटो से न दिखने वाली खराबियाँ पकड़ी जाती हैं। बड़े प्लांट भी घंटों में स्कैन हो जाते हैं — बिना छत/स्ट्रक्चर पर चढ़े और बिना प्लांट को बंद किए।

मुख्य रूप से: हॉटस्पॉट (गरम सेल), बायपास-डायोड की खराबी, बंद या डिस्कनेक्ट स्ट्रिंग, पूरी तरह ठंडे (यानी बिजली न बनाने वाले) मॉड्यूल, और धूल/जमाव (soiling) से उपज गिरना। ये सब तापमान पैटर्न के रूप में उपज-रिपोर्ट में असर दिखने से बहुत पहले पकड़े जा सकते हैं, जिससे मरम्मत जल्दी और सस्ती हो जाती है।

1) प्लांट का साइज़ और मॉड्यूल-लेआउट तय करें। 2) साफ़ धूप वाला दिन चुनें (अच्छे तापमान-अंतर के लिए ज़रूरी)। 3) DGCA-रजिस्टर्ड थर्मल ड्रोन ऑपरेटर से फ्लाई-ओवर कराएँ। 4) IR इमेज + प्रत्येक मॉड्यूल/स्ट्रिंग की उपज-डेटा जुटाएँ। 5) रिपोर्ट में खराब मॉड्यूल, हॉटस्पॉट और उपज-हानि की सूची लें, फिर लक्षित मरम्मत/सफाई करवाएँ।

भारत में ड्रोन DGCA के ड्रोन नियम, 2021 के अंतर्गत आते हैं। ड्रोन को Digital Sky पोर्टल पर रजिस्टर कर UIN लेना होता है, और तय श्रेणी/वज़न व एयरस्पेस-ज़ोन (ग्रीन/येलो/रेड) के अनुसार रिमोट-पायलट सर्टिफिकेट और अनुमति ज़रूरी हो सकती है। इसलिए हमेशा DGCA-अनुपालन करने वाला ऑपरेटर चुनें — यह जाँच के लिए कानूनी और सुरक्षित तरीका है।

अगर आपको किसी ड्रोन सेवा से पहले ही अपने प्लांट की IR-थर्मोग्राफी तस्वीरें मिल चुकी हैं, तो Stromfee-AI उन्हें आपके लाइव उपज-डेटा के साथ जोड़कर विश्लेषण करता है और खराब मॉड्यूल, हॉटस्पॉट, बायपास-डायोड दोष व बिजली-हानि की पहचान करता है — प्रति स्ट्रिंग, प्रति मॉड्यूल। रिपोर्ट सामान्यतः 5 कार्यदिवस में मिलती है।